यह समाज ना पुरुष प्रधान, ना स्त्री प्रधान रहा, यह समाज हमेशा ऋषि प्रधान रहा
लोगो को बरगलाने के लिए मेकोले वचनो का ही उपयोग करते है जैसे भारतीय समाज जाहिल-गंवार था, अंग्रेज़ो ने इसमे कहीं कुप्रथाओं को दूर किया, भारतीय स्त्रियाँ पर्दे मे रहती थी, पति के साथ जबरन जलायी जाती थी, स्त्रियाँ अनपढ़ होती थी वगेरह घिनौने आरोप भारतीय समाज को तोड़नेवाले षडयंत्रकारियों ने जाती, पंथ, भाषा वर्ग, शहरी- ग्रामीण के साथ – साथ स्त्री – पुरुष के नाम पर भी समाज को तोड़ा । भारतीय समाज पर आरोप लगाया की यह समाज पुरुष प्रधान समाज है यहाँ स्त्रियाँ दूसरे दर्जे की है हमारे शास्त्रो पर भी आरोप लगे की उन्होने स्त्री को या तो पुजा की देवी बना दिया या नर्क का द्वार कह दिया उसे मनुष्य का दर्जा नहीं दिया
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